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श्री तुलजाभवानी मंदिर संस्थान द्वारा वर्तमान में मंदिर तथा मंदिर परिसर के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार का कार्य प्रगति पर है। इस दौरान आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम दर्शन के लिए प्रवेश व्यवस्था में निम्नानुसार बदलाव किए गए हैं: लगातार छुट्टियों / भारी भीड़ के दिनों में प्रवेश व्यवस्था: लगातार छुट्टियों के दिनों में, अत्यधिक भीड़ के समय अथवा मंदिर प्रशासन द्वारा जारी सार्वजनिक सूचना के अनुसार 'महाद्वार' (मुख्य द्वार) से प्रवेश बंद रहेगा। इस दौरान श्रद्धालुओं को 'बिडकर पायरी' के समीप वाले मार्ग से दर्शन मंडप में प्रवेश दिया जाएगा। सामान्य दिनों में प्रवेश व्यवस्था: सामान्य दिनों एवं अन्य समय में श्रद्धालुओं के लिए पूर्ववत 'महाद्वार' से ही प्रवेश चालू रहेगा। दर्शन का समय: संरक्षण कार्य जारी रहने के बावजूद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन पूर्व निर्धारित समयानुसार ही नियमित रूप से शुरू रहेगा। पेड दर्शन पास (Paid Darshan Pass): पेड दर्शन पास की व्यवस्था संबंधित निर्धारित स्थानों/काउंटरों पर उपलब्ध कराई गई है। महत्वपूर्ण निवेदन: सभी श्रद्धालुओं से अनुरोध है कि वे यात्रा से पूर्व आधिकारिक जानकारी की पुनः पुष्टि कर लें। इस सूचना का मुख्य उद्देश्य सभी भक्तों को सही जानकारी प्रदान करना है ताकि उन्हें दर्शन में आसानी हो।

हिंदू धर्म में नवरात्रि का त्योहार बहुत पवित्र और सम्मानित जगह रखता है। नवरात्रि के पहले दिन, आश्विन शुद्ध प्रतिपदा को, ब्रह्मांड की आदि शक्ति का स्वागत करने के लिए हर घर में 'घटस्थापना' की जाती है। घटस्थापना सिर्फ़ एक धार्मिक रस्म नहीं है, यह एक ऐसा त्योहार है जो प्रकृति की पूजा करता है और घर में पॉज़िटिव एनर्जी लाता है। घटस्थापना का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व:- घटस्थापना नवरात्रि की नींव है। 'घट' का मतलब है एक बर्तन, जिसे ब्रह्मांड और इंसान के शरीर का प्रतीक माना जाता है। दैवीय शक्ति का आह्वान: घटस्थापना करके, हम नौ दिनों तक घट में और अंबाबाई की मूर्ति में देवी दुर्गा के अलग-अलग रूपों का आह्वान करते हैं। खुशहाली का प्रतीक: घट के नीचे मिट्टी में अनाज बोया जाता है। इसके पीछे मकसद यह है कि जैसे-जैसे यह अनाज नौ दिनों में अंकुरित और बढ़ेगा, वैसे-वैसे हमारे घर में सुख, खुशहाली और धन बढ़े। निसर्ग पूजा: इस रस्म में मिट्टी, पानी, पत्ते और अनाज जैसी प्राकृतिक चीज़ों का इस्तेमाल किया जाता है। यह रस्म हमें प्रकृति के प्रति आभारी होना सिखाती है। घटस्थापना के लिए ज़रूरी पूरा सामान: 1) घट/कलश: तांबे, पीतल या मिट्टी का कलश। 2) देवी की मूर्ति या फोटो: जिसकी हम नौ दिनों तक पूजा करना चाहते हैं। 3) अनाज बोने के लिए चौड़ा बर्तन/पत्ता/या हमारे रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार सामान। 4) काली मिट्टी: खेत या बगीचे की साफ़ मिट्टी। 5) सप्तधान्य: जौ (यव), गेहूं, तिल, ज्वार, करी, मूंग, बाजरा और चना वगैरह अनाज का सामान (इन अनाजों को एक साथ रखना चाहिए)। कलश में डालने के लिए सामान: शुद्ध पानी या गंगाजल 2) सुपारी और सिक्का (1 / उपलब्ध रुपये का सिक्का) दूर्वा और हल्दी-कुंक/अक्षदा दूसरा सामान: - 1) आम या विदा के पत्ते: कलश पर रखने के लिए (5 या 7 पत्ते)। 2) नारियल: कलश पर रखने के लिए (बेहतर होगा कि शिखर के साथ या आपके परिवार की परंपरा के अनुसार)। 3) कपड़ा: देवी के आसन के लिए। 4) नौ दिनों तक लगातार जलने वाला एक दीपक और उसके लिए ज़रूरी तेल/घी और बाती। 5) अलग-अलग नागवेली के पत्तों की माला, फूलों की माला जो रोज़ाना तय घाट पर चढ़ाई जाए। 6) ज़रूरी पूजा का सामान जैसे धूप, दीपक, कपूर और अगरबत्ती वगैरह। घटस्थापना की क्लासिकल व्यवस्था:- 1) घटस्थापना हमेशा साफ़ और पवित्र जगह/देवघर के सामने करनी चाहिए। इसके लिए घर का ईशान कोण सबसे अच्छा माना जाता है। 2) जगह की सफ़ाई: पूजा की जगह को अच्छी तरह पोंछ लें। वहाँ एक सुंदर रंगोली बनाएँ। 3) अनाज बोना: अपनी परंपरा के अनुसार बर्तन/गमले/जगह में थोड़ी मिट्टी बिछाएँ और उस पर 'सप्त धान्य' बोएँ और फिर ऊपर से थोड़ी मिट्टी डालें। इस पर थोड़ा पानी छिड़कें। 4) कलश तैयार करना: तांबे या मिट्टी के कलश में साफ पानी भरें। इसमें थोड़ा गंगाजल, हल्दी-कंद, अक्षत, एक सुपारी, एक सिक्का और दूर्वा डालें। सही सामान पूजा-पाठ के तरीके से रखें। 5) पत्ते और नारियल रखना: कलश के मुंह पर 5 या 7 आम के पत्ते गोलाई में रखें। इस पर एक नारियल (जिसका तना ऊपर की ओर हो) रखें। इस तैयार घट को मिट्टी के साथ बीच में रखें। 6) देवी की स्थापना: घट के किनारे या पीछे देवी की मूर्ति या फोटो स्थापित करें। या अगर देवघर के सामने घाट की व्यवस्था है, तो पूरे देवघर के सामने नौ दिनों तक पूजा करनी चाहिए, देवी को हल्दी-कंद और फूलों की माला चढ़ाएं। 7) अखंड दीप जलाना: आखिर में देवी को याद करके 'अखंड दीप' जलाएं। ध्यान रखें कि यह दीया नवरात्रि के नौ दिनों तक लगातार जलता रहे।